अनेक शब्दों के लिए एक शब्द भाग 02

( ख )

खाने से बचा हुआ जूठा भोजन- (उच्छिष्ट)

खाने योग्य पदार्थ- (खाद्य)

खाने की इच्छा- (बुभुक्षा)

खून से रँगा हुआ- (रक्तरंजित)

खेलना का मैदान- (क्रीड़ास्थल)

( ग )

गिरा हुआ- (पतित)

गृह (घर) बसाकर स्थित (रहनेवाला)- (गृहस्थ)

ग्राम का रहनेवाला- (ग्रामीण)

गोद लिया हुआ पुत्र- (दत्तक (पुत्र) )

गोपों को घेरा बाँधकर नाचने की क्रिया- (रास)

गुरु के समीप रहनेवाला विद्यार्थी- (अन्तेवासी)

गुण-दोषों का विवेचन करने वाला- (आलोचक)

गणित शास्त्र के जानकार- (गणितज्ञ)

गंगा का पुत्र- (गांगेय)

गृह (घर) बसा कर रहने वाला- (गृहस्थ)

गगन (आकाश) चूमने वाला- (गगनचुम्बी)

( घ )

घास छीलने वाला- (घसियारा)

घास खानेवाला- (तृणभोजी)

घूस लेने वाला/रिश्वत लेने वाला- (घूसखोर/रिश्वतखोर)

घुलने योग्य पदार्थ- (घुलनशील)

घृणा करने योग्य- (घृणास्पद)

घर के सबसे ऊपर के खंड की कोठरी- (अटारी)

घर के सामने का मंच- (आलिन्द)

घूम-फिरकर सौदा बेचने वाला- (फेरीवाला)

( च )

चार वेदों को जानने वाला- (चतुर्वेदी)

चार राहों वाला- (चौराहा)

चेतन स्वरूप की माया- (चिद्विलास)

चूहे फँसाने का पिंजड़ा- (चूहेदानी)

चौथे दिन आने वाला ज्वर- (चौथिया)

चारों ओर की सीमा- (चौहदी)

चारों ओर जल से घिरा हुआ भू-भाग- (टापू)

चोरी छिपे चुंगी शुल्क आदि दिये बिना माल लाकर बेचनेवाला- (तस्कर)

चौपायों के बाँधने का स्थान- (थान)

चार मुखों वाला – (चतुरानन)

चिंता में डूबा हुआ- (चिंतित)

चुनाव में अपना मत देने की क्रिया- (मतदान)

( छ )

छिपे वेश में रहना- (छद्मवेश)

छात्रों के रहने का स्थान- (छात्रावास)

छः महीने के समय से सम्बन्धित- (छमाही)

छत में टाँगने का शीशे का कमल या गिलास, जिसमें मोमबत्तियाँ जलती हों- (फानूस)

छोटे कद का आदमी- (बौना)

छह कोने वाली आकृति- (षट्कोण)

छह-छह महीने पर होने वाला- (षाण्मासिक)

छूत से फैलने वाला रोग- (संक्रामक)

छाती का घाव- (उरक्षत)

छः मुँहों वाला- (षण्मुख/षडानन)

( ज )

जो कभी न मरे- (अमर)

जो पढ़ा-लिखा न हो- (अपढ़, अनपढ़)

जो अक्षर (पढ़ना-लिखना) जानता है- (साक्षर)

जो दूसरों पर अत्याचार करें- (अत्याचारी)

जो दिखाई न दे- (अदृश्य)

जो कभी नष्ट न हो- (अनश्वर)

जो उच्च कुल में उत्पन्न हुआ हो- (कुलीन)

जो क्षमा के योग्य हो- (क्षम्य)

जो कम बोलता हो- (मितभाषी)

जो अधिक बोलता हो- (वाचाल)

जो सब जगह व्याप्त हो- (सर्वव्यापक)

जो देखने योग्य हो- (दर्शनीय)

जो कुछ न करता हो-(अकर्मण्य)

जो पुत्र गोद लिया हो- (दत्तक)

जो मान-सम्मान के योग्य हो- (माननीय)

जो नष्ट न होने वाला हो- (अविनाशी)

जो किसी का पक्ष न ले- (तटस्थ)

जो परिचित न हो- (अपरिचित)

जो स्थिर रहे- (स्थावर)

जो वन में घूमता हो- (वनचर)

जो इस लोक से बाहर की बात हो- (अलौकिक)

जो धन का दुरुपयोग करता है- (अपव्ययी)

जो कानून के विरुद्ध हो- (अवैध)

जो कानून के अनुसार हो- (वैध)

जो पहले न पढ़ा हो- (अपठित)

जो आँखों के सामने न हो- (अप्रत्यक्ष)

जो आँखों के सामने हो- (प्रत्यक्ष)

जो दो भाषाएँ जानता हो- (दुभाषिया)

जो धर्म का काम करे- (धर्मात्मा)

जो अभी – अभी पैदा हुआ हो- (नवजात)

जो कठिनाई से प्राप्त हो- (दुर्लभ)

जो स्वयं पैदा हुआ हो- (स्वयंभू)

जो शरण में आया हो- (शरणागत)

जो क्षमा करने के योग्य हो- (क्षम्य)

जो बहुत समय कर ठहरे- (चिरस्थायी)

जो उच्च कुल में उत्पन्न हुआ हो- (कुलीन)

जो कभी नष्ट न हो- (अनश्वर)

जो उदार न हो- (अनुदार)

जो चित्र बनाता हो- (चित्रकार)

जो बूढ़ा न हो- (अजर)

जो नहीं हो सकता- (असंभव)

जो हो सकता- (संभव)

जो आमिष (मांस) नहीं खाता- (निरामिष)

जो पहरा देता है- (प्रहरी)

जो दूसरों पर अत्याचार करें- (अत्याचारी)

जो किसी पक्ष में न हो- (तटस्थ)

जो कभी न मरे- (अमर)

जो कहा न जा सके- (अकथनीय)

जो गिना न जा सके- (अगणित)

जो थोड़ी देर पहले पैदा हुआ हो- (नवजात)

जो जन्म से अंधा हो- (जन्मांध)

जो किये गये उपकारों को जानता या (मानता) है- ( कृतज्ञ)

जो किये गये उपकारों को नहीं मानता है- (कृतघ्न)

जो टुकड़े-टुकड़े हो गया हो- (खंडित)

जो क्षमा के योग्य हो- (क्षम्य)

जो सब जगह व्याप्त हो-(सर्वव्यापक)

जो परिचित न हो- (अपरिचित)

जो सब कुछ जानता है- (सर्वज्ञ)

जो किसी की ओर से है- (प्रतिनिधि)

जो बहुत जानता है- (बहुज्ञ)

जो स्त्री कविता लिखती है- (कवयित्री)

जो पुरुष कविता रचता है- (कवि)

जो शत्रु की हत्या करता है- (शत्रुघ्न)

जो मांस का आहार करता है- (मांसाहारी)

जो शाक का आहार करता है-(शाकाहारी)

जो फल का आहार करता है- (फलाहारी)

जो विज्ञान जनता है- (वैज्ञानिक)

जो व्याकरण जानता है- (वैयाकरण)

जो लोक में संभव न हो- (अलौकिक)

जो स्वार्थ (अपनी ही भलाई) चाहता है- (स्वार्थी)

जो परमार्थ( दूसरों की भलाई) चाहता है-(परमार्थी)

जो देखने में प्रिय लगता है- (प्रियदर्शी)

जो आसानी से लब्ध (प्राप्य) है- (सुलभ)

जो पर (दूसरों) के अधीन है- (पराधीन)

जो मन को हर ले- (मनोहर)

जो धर्म करता है- (धर्मात्मा)

जो साँप पकड़ता है- (सँपेरा)

जो पीने योग्य हो- (पेय)

जो नाचता है- (नर्तक, नृत्यकार)

जो अभिनय करता है- (अभिनेता)

जो कुछ नहीं जानता है- (अज्ञ)

जो अग्र (आगे) की बात सोचता है- (अग्रशोची)

जो नया आया हुआ हो- (नवागन्तुक)

जो भू के गर्भ (भीतर) का हाल जानता हो- (भूगर्भवेत्ता)

जो कहा न जा सके- (अकथनीय)

जो भू को धारण करता है- (भूधर)

जो सर्वशक्तिसम्पत्र है- (सर्वशक्तिमान्)

जो कर्त्तव्य से च्युत हो गया है- (कर्त्तव्यच्युत)

जो (बात) वर्णन के अतीत (बाहर) है- (वर्णनातीत)

जो स्त्री सूर्य भी न देख सके- (असूर्यम्पाश्या)

जो अत्यन्त कष्ट से निवारित किया जा सके- (दुर्निवार)

जो आग्रह सत्य हो- (सत्याग्रह)

जो मुकदमा दायर करता है- (वादी)

जो अश्र्व (घोड़े) का आरोही (सवार) है- (अश्र्वारोही)

जो संगीत जानता है- (संगीतज्ञ)

जो कला जानता है या कला की रचना करता है- (कलाकार)

जो सरों में जनमता है- (सरसिज)

जो अच्छे कुल में उत्पत्र हुआ है- (कुलीन)

जो सबमें व्याप्त है- (सर्वव्यापी)

जो किसी की ओर (प्रति) से है- (प्रतिनिधि)

जो मुकदमा लड़ता रहता है- (मुकदमेबाज)

जो देने योग्य है- (देय)

जो देखा नहीं जा सकता- (अदृश्य)

जो वचन से परे हो-(वचनातीत)

जो कहा गया है-(कथित)

जो स्त्री के वशीभूत या उसके स्वभाव का है- (स्त्रैण)

जो बहुत बोलता है- (वाचाल)

जो स्त्री अभिनय करे- (अभिनेत्री)

जो पुरुष अभिनय करे- (अभिनेता)

जो दूसरे से ईर्ष्या करता है- (ईर्ष्यालु)

जो शत्रु की हत्या करता है- (शत्रुघ)

जो पिता की हत्या कर चुका- (पितृहन्ता)

जो माता की हत्या कर चुका- (मातृहन्ता)

जो अपनी हत्या करता है- (आत्मघाती)

जो पर के अधीन है- (पराधीन)

जो देखने में प्रिय लगता है- (प्रियदर्शी)

जो नभ या ख (आकाश) में चलता है- (नभचर, खेचर)

जो द्वार का पालन (रक्षा) करता है- (द्वारपाल)

जो शास्त्र जानता है- (शास्त्रज्ञ)

जो कोई वस्तु वहन करता है- (वाहक)

जो पोत (जहाज) युद्ध का है- (युद्धपोत)

जो चक्र धारण करता है- (चक्रधर)

जो नष्ट होनेवाला है- (नश्र्वर)

जो सबको समान भाव से देखे- (समदर्शी)

जो भेदा या तोड़ा न जा सके- (अभेद्य)

जो कठिनाई (दुर ) से भेदा या तोड़ा जा सके- (दुर्भेद्य)

जो मापा न जा सके- (अपरिमेय)

जो प्रमेय (प्रमाण से सिद्ध) न हो- (अप्रमेय)

जो इच्छा के अधीन है- (इच्छाधीन)

जो दूसरे के स्थान पर अस्थायी रूप से काम करे- (स्थानापत्र)

जो विधि या कानून के विरुद्ध है- (अवैध, गैरकानूनी)

जो लोक में सम्भव न हो- (अलौकिक)

जो मन को हर ले- (मनोहर)

जो अनुकरण करने योग्य हो- (अनुकरणीय)

जो दायर मुकदमे का प्रतिवाद (बचाव या काट) करे- (प्रतिवादी)

जो राजगद्दी का अधिकारी हो- (युवराज)

जो धर्माचरण करता है- (धर्मात्मा)

जो पुस्तकों की आलोचना या समीक्षा करता है- (आलोचक, समीक्षक)

जो व्याख्या करता है- (व्याख्याता)

जो साँप पकड़ता और उसका खेल करता है- (सँपेरा)

जो मोक्ष चाहता हो- (मुमुक्षु)

जो स्मरण रखने योग्य है- (स्मरणीय)

जो पांचाल देश की है – (पांचाली)

जो किसी का पक्ष न ले- (निष्पक्ष)

जो यान (सवारी) जल में चलता है- (जलयान)

जो पुरुष लोहे की तरह बलिष्ठ है- (लौहपुरुष)

जो खाया न जा सके- अखाद्य

जो सबके आगे रहता हो- (अग्रणी)

जो नेत्रों से दिखाई न दे- (अगोचर)

जो खाली न जाय- (अचूक)

जो अपने स्थान या स्थिति से अलग न किया जा सके- (अच्युत)

जो छूने योग्य न हो- (अछूत)

जो छुआ न गया हो- (अछूता)

जो बूढा न हो- (अजर)

जो न जाना गया हो- (अज्ञात)

जो अपनी बात से न टले- (अटल)

जो अपनी जगह से न डिगे- (अडिग)

जो सबके मन की जनता हो- (अंतर्यामी)

जो बीत गया है- (अतीत)

जो दबाया न जा सके- (अदम्य)

जो देखा न जा सके- (अदृश्य)

जो देखने योग्य न हो-(अदर्शनीय)

जो पहले न देखा गया हो- (अदृष्टपूर्व)

जो किसी विशेष समय तक ही लागू हो- (अध्यादेश)

जो परीक्षा में परीक्षा में उत्तीर्ण न हुआ हो- (अनुत्तीर्ण)

जो मापा न जा सके- (अपरिमेय)

जो आँखों के सामने न हो- (अप्रत्यक्ष/परोक्ष)

जो पूरा या भरा हुआ न हो- (अपूर्ण)

जो किसी की ओर मुँह किये हुए हो- (अभिमुख)

जो कभी मृत्यु को प्राप्त न हो- (अमर)

जो काव्य, संगीत आदि का रस न ले- (अरसिक)

जो इस लोक का न हो- (अलौकिक)

जो साधा (ठीक किया) न जा सके- (असाध्य)

जो शोक करने योग्य नहीं है- (अशोच्य)

जो स्त्री (ऐसी पर्दानशीन है कि) सूर्य को भी न देख सके- (असूर्यम्पश्या)

जो विधान या नियम के विरुद्ध हो- (असंवैधानिक)

जो पहले कभी न हुआ हो- (अभूतपूर्व)

जो सदा से चलता आ रहा है- (अनवरत)

जो आगे की न सोचता हो- (अदूरदर्शी)

जो समय पर न हो- (असामयिक)

जो दिया न जा सके- (अदेय)

जो मानव के योग्य न हो- (अमानुषिक)

जो हिसाब-किताब की जाँच करता हो- (अंकेक्षक)

जो पहले कभी घटित न हुआ हो- (अघटित)

जो पहले कभी नहीं सुना गया- (अश्रुतपूर्व)

जो जन्म लेते ही गिर या मर गया हो- (आदण्डपात)

जो आलोचना के योग्य हो- (आलोच्य)

जो इंद्रियों के ज्ञान के बाहर है- (इंद्रियातीत)

जो छाती के बल चलता हो- (उदग (सर्प)

जो धरती फोड़ कर जनमता है- (उदभिज)

जो उद्धार करता है- (उद्धारक)

जो किसी नियम को न माने- (उच्छृंखल)

जो भूमि उपजाऊ हो- (उर्वरा)

जो दिन में एक बार भोजन करता है- (एकाहारी)

जो अपनी इच्छा पर निर्भर हो- (ऐच्छिक)

जो कान को कटु लगे- (कर्णकटु)

जो कटु बोलता है- (कटुभाषी)

जो कष्ट को सहन कर सके- (कष्टसहिष्णु)

जो काम से जी चुराता है- (कामचोर)

जो कर्तव्य से च्युत हो गया है- (कर्तव्यच्युत)

जो पुरुष कविता रचता है- (कवि)

जो स्त्री कविता रचती है- (कवियित्री)

जो कल्पना से परे हो- (कल्पनातीत)

जो केन्द्र की ओर उन्मुख होता हो- (केन्द्राभिमुख)

जो सदैव हाथ में खड्ग लिए रहता हो- (खड़गहस्त)

जो गाँव से सम्बन्धित हो- (ग्रामीण)

जो कठिनाइयों से पचता है- (गरिष्ठ/गुरुपक)

जो गिरि (पहाड़) को धारण करता हो- (गिरधारी)

जो छिपाने योग्य हो- (गोपनीय)

जो चक्र धारण करता हो- (चक्रधारी/चक्रधर)

जो चंद्र धारण करता हो- (चंद्रधारी)

जो चिरकाल तक बना रहे- (चिरस्थायी)

जो चर्चा का विषय हो- (चर्चित)

जो अपने स्थान से डिग गया हो- (च्युत)

जो जरायु (गर्भ की थैली) से जनमता है- (जरायुज)

जो यान जल में चलता हो- (जलयान)

जो तर्क योग्य हो- (तार्किक)

जो तर्क के आधार पर सही सिद्ध हो- (तर्कसंगत)

जो तीन गुणों (सत्व, रज, व तम) से परे हो- (त्रिगुणातीत)

जो दर्शन-शास्त्र का ज्ञाता हो- (दार्शनिक)

जो द्वार का पालन (रक्षा) करता है- (द्वारपाल)

जो मुश्किल से प्राप्त हो- (दुष्प्राप्य)

जो विलंब या टालमटोल से काम करे- (दीर्घसूत्री)

जो वस्तु दूसरे के यहाँ रखी हो- (धरोहर)

जो एक अक्षर भी न जानता हो- (निरक्षर)

जो तेजहीन हो- (निस्तेज)

जो अपने लाभ या स्वार्थ का ध्यान न रखता हो- (निःस्वार्थ)

जो कामना रहित हो- (निष्काम)

जो चिन्ता से रहित हो- (निश्चिंत)

जो उत्तर न दे सके- (निरुत्तर)

जो न्याय जनता हो- (नैयायिक)

जो अति (बहुत) लघु (छोटा) नहीं है- (नातिलघु)

जो अति (बहुत) दीर्घ (बड़ा) नहीं है- (नातिदीर्घ)

जो नृत्य करता है- (नृत्यकार/नर्तक)

जो नीचे लिखा गया है- (निम्नलिखित)

जो दृष्टि के क्षेत्र से परे हो- (परोक्ष)

जो परायों का अर्थ (हित) चाहता है- (परमार्थी)

जो अपने पथ से भटक गया हो- (पथभ्रष्ट)

जो दूसरों का भला चाहने वाला हो- (परार्थी)

जो दूसरों का उपकार करने वाला हो)- (परोपकारी)

जो पृथ्वी से सम्बन्धित हो- (पार्थिव)

जो पिंड से जनमता है- (पिंडज)

जो उक्ति बार-बार कही जाय- (पुनरुक्ति)

जो किसी का प्रतिनिधित्व (किसी की जगह काम) करता है- (प्रतिनिधि)

जो शीघ्र किसी बात या युक्ति को सोच ले- (प्रत्युत्पन्नमति)

जो प्रणाम करने योग्य हो- (प्रणम्य)

जो मुकदमे का प्रतिवाद करे- (प्रतिवादी)

जो पहरा देने वाला हो- (प्रहरी)

जो पूछने योग्य हो- (प्रष्टव्य)

जो प्रिय बोलता हो- (प्रियवादी)

जो दूसरे के अधीन हो- (पराधीन)

जो प्रशंसा के योग्य हो- (प्रशंसनीय)

जो अपने मातृभूमि छोड़ विदेश में रहता हो- (प्रवासी)

जो केवल फल खाकर निर्वाह करता हो- (फलाहारी)

जो बुद्धि द्वारा जाना जा सके- (बुद्धिजीवी)

जो भाग्य की धनी हो- (भाग्यवान)

जो भू धारण करता है- (भूतेश)

जो पृथ्वी के गर्भ (भीतर) के हाल/शास्त्र जानता हो- (भूगर्भवेत्ता/भूगर्भशास्त्री)

जो पूर्व में था या हुआ पर अभी नही है – (भूतपूर्व)

जो मछली का आहार करता है- (मत्स्याहारी)

जो हाथों से मुक्त है अर्थात अधिक देने वाला- (मुक्तहस्त)

जो एक स्थान पर टिक कर नहीं रहता- (यायावर)

जो युद्ध में स्थिर रहता है- (युधिष्ठिर)

जो क्रम के अनुसार हो- (यथाक्रम)

जो रंग (नाट्य) का मंच (स्टेज) है- (रंगमंच)

जो रथ पर सवार है- (रथी)

जो राज्य या राजा से द्रोह करे- (राजद्रोही)

जो राजनीति जानता है- (राजनीतिज्ञ)

जो भूमि का हिसाब-किताब रखता हो- (लेखपाल)

जो आसानी से पचता हो- (लघुपाक)

जो वर्णन के बाहर हो- (वर्णनातीत)

जो पूर्ण रूप से बहरा हो- (वज्रबधिर)

जो मुकदमा दायर करता है- (वादी /मुदई)

जो कोई वस्तु वहन करता है- (वाहक)

जो अपने धर्म के विपरीत आचरण करता हो- (विधर्मी)

जो विश्व भर का बंधु है- (विश्वबंधु)

जो विषयों में आसक्त्त है- (विषयासक्त)

जो विषय विचार में आ सकता है- (विचारगम्य)

जो विश्वास करने योग्य हो- (विश्वसनीय)

जो विश्व का हित चाहता है- (विश्वहितैषी)

जो व्याख्या करता हो- (व्याख्याता)

जो शक्ति का उपासक हो- (शाक्त)

जो अन्न और साग-सब्जी खाता हो- (शाकाहारी)

जो तेज चलता हो- (शीघ्रगामी)

जो सुनने योग्य हो- (श्रोतव्य/श्रवणीय)

जो सुनने में मधुर हो- (श्रुतिमधुर)

जो संगीत जनता हो- (संगीतज्ञ)

जो सबको एकसमान देखता है- (समदर्शी)

जो किसी सभा का सदस्य हो- (सभासद)

जो सबको प्यारा है- (सर्वप्रिय)

जो सव्य (बायें हाथ से हथियार आदि चलाने में) सध हुआ हो- (सव्यसाची)

जो नाटक का सूत्र धारण (संचालन) करता है- (सूत्रधार)

जो दया के साथ (दयालु) है- (सदय)

जो सरलता से बोध्य (समझने योग्य) हो- (सुबोध)

जो सर्वशक्तिसंपन्न है- (सर्वशक्तिमान)

जो स्मरण करने योग्य है- (स्मरणीय)

जो स्त्री के वशीभूत या उसके स्वभाव का हो- (स्त्रैण)

जो स्वयं ही सिद्ध (ठीक) हो- (स्वयंसिद्ध)

जो दूसरे की हत्या करता है- (हत्यारा)