अनुतान

जब हम किसी ध्वनि का उच्चारण करते हैं तो उसका एक ‘सुर’ होता है। जब एकाधिक ध्वनियों से बने शब्द, वाक्यांश या वाक्य का प्रयोग करते हैं तो सुर के उतार-चढ़ाव से एक सुरलहर बन जाती है। इसे अनुतान कहते हैं। एक ही शब्द को विभिन्न अनुतानों में उच्चरित करने से उसका अर्थ बदल जाता है। उदाहरण के लिए ‘सुनो’ शब्द लें। विभिन्न अनुतानों में इसका अर्थ अलग-अलग होगा।

सामान्य कथन (नेताजी का भाषण ध्यान से सुनो।)

आग्रह या मनुहार के अर्थ में (मेरी बात तो सुनो!)

क्रोध के अर्थ में (अपनी ही हाँके जाते हो, कुछ दूसरों की भी सुनो।)