जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय उद्यान है और 1 9 36 में लुप्तप्राय बंगाल बाघ की रक्षा के लिए हैंली नेशनल पार्क के रूप में स्थापित किया गया था। यह उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है और इसका नाम जिम कॉर्बेट के नाम पर रखा गया था स्थापना की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई था।

बाघ परियोजना पहल के आने आने वाला यह पहला पार्क था। यह एक गौरवशाली पशु विहार है। यह रामगंगा की प्रसलीदून घाटी में 1318.54 वर्ग किलोमीटर में बसा हुआ है जिसके साथ 821.99 वर्ग किलोमीटर का जिम कॉर्बेट व्यास संरक्षित क्षेत्र भी आता है।

पार्क में उप-हिमालियन बेल्ट की भौगोलिक और पारिस्थितिकीय विशेषताएं हैं। यह एक इकोटोरिज़्म गंतव्य भी है और यहां पौधों की 488 प्रजातियों और जीवों की एक विविधता है। पर्यटन की परियोजना में वृद्धि और अन्य समस्याएं पार्क के पारिस्थितिक संतुलन के लिए एक गंभीर चुनौती पेश कर रहे हैं।

कॉर्बेट एक लंबे समय के लिए के लिए और वन्यजीव प्रेमियों के लिए होटल रहा है। कोर्बेट टाइगर रिजर्व के चयनित क्षेत्रों में ही पर्यटन गतिविधि को अनुमति दी जाती है लोगों को इसके शानदार परिदृश्य और विविध वन्यजीव देखना का मौका मिल। हाल के वर्षों में यहां आने वाले लोगों की संख्या में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है। वर्तमान में, हर मौसम में 70,000 से अधिक आगंतुक पार्क में आते हैं।

कॉर्बेट नेशनल पार्क में 520.8 वर्ग (201.1 वर्ग मील) में पहाड़ी, नदी के बेल्ट, दलदलीय गड्ढे, घास के मैदान और एक बड़ा झील शामिल है। ऊंचाई 1,300 से 4,000 फीट (400 से 1,220 मीटर) तक ऐसा होता है। यहाँ शीतकालीन रातें ठंडी होती है लेकिन दिन धूपदार और गर्म होता है। यहां जुलाई से सितंबर तक बारिश होता है।

घने नम पर्णपाती वन में मुख्य रूप से साल, हल्का, पीपल, रोहिनी और आम के पेड़ होते हैं। जंगल पार्क का लगभग 73% हिस्सा घेरते हैं, इस क्षेत्र में 10% घास के मैदान होते हैं। यहां 110 पेड़ की पप्रजातियां, 50 स्तनधारियों की प्रजातियां, 580 पक्षी प्रजातियां और 25 सरीसप्रप प्रजातियां हैं।
दिल्ली से मुरादाबाद – काशीपुर – रामनगर डाउन कार्बेट नेशनल पार्क की दूरी 2 9 0 कि.मी. है। कार्बेट नेशनल पार्क में मिल के भ्रमण का समय नवम्बर से मई तक होता है। इस मौसम में ट्रैवल एजेन्सियां ​​कार्बेट नेशनल पार्क में सैलानियों को घुमाने का प्रबन्ध हैं।

कुमाऊं विकास निगम भी प्रति शुक्रवार की दिल्ली से कार्बेट नेशनल पार्क तक के लिए ले जाने के लिए संचालित भ्रमण (कंडक टेड टूर्स) का आयोजन करता है। कुमाऊं विकास निगम की बसों में अनुभवी गाइड होते हैं जो जानवरों की जानकारी, उनकी आदतों को बताते हुए बातें करते हैं।
यहाँ पर शेर, हाथी, भालू, बाघ, सुअर, हिरण, चीतल, साँभर, पांडा, काकड़, नीलगाय, घुरल और चीता आदि ‘वन्य प्राणी’ अधिक संख्या में मिलते हैं।

इस तरह के वन में अजगर और कई प्रकार के सांप भी निवास करते हैं। जहां इस वन्य पशु विहार में कई प्रकार के भयानक जन्तु पाये जाते हैं, इस पार्क में लगभग 600 रंग – बिरगे पक्षियों की जातियां भी होती हैं। यह देश एक ऐसा अभयारण्य है जिसमें वन्य जन्मों की कई जातियां – प्रजातियों के साथ पक्षियों का भी आधिकारिक रहता है। आज विश्व का ऐसा कोई कोना नहीं है, जहां के पर्यटक इस पार्क को देखने नहीं आते हैं।
अंग्रेज वन्य जन्तुओं की रक्षा करने के लिए भी शौकीन थे। सन् 1 9 35 में रामगंगा के इस अंचल को वन्य पशु के रक्षार्थ सुरक्षित किया गया। उस समय के गवर्नर स्थानम हेली के नाम पर इस पार्क का नाम ‘हेली नेशनल पार्क’ रखा गया। स्वतंत्रता मिल के बाद इस पार्क का नाम ‘रामगंगा नेशनल पार्क’ रखा गया। स्वतंत्रता के बाद विश्व में जिम कार्बेट नाम एक प्रसिद्ध शिकारी के रूप में फैल गया था। जिम कार्बेट जहां अचूक निशानेबाज थे वैसे वन्य पशु के प्रिय साथी भी थे। कुमाऊँ के कई आदमखोर शेरों को मारकर सैकड़ों लोगों की जान बचाई थी।

हजारों को भय से मुक्त करवाया था। गढ़वाल में भी एक आदमखोर शेर ने कई लोगों की जान ली ली थी। उस आदमखोर को भी जिम कार्बेट ने ही मारा था। वह आदमखोर गढ़वाल के रुद्र प्रयाग के आस-पास कई लोग को मार चुका था। जिम कार्बेट ने ‘द मैन ईटर आफ रुद्र प्रयाग’ नाम की किताबें लिखीं।

भारत सरकार ने जब जिम कार्बेट की लोकप्रियता को समझा और यह अनुभव किया कि उनके कार्यक्षेत्र बी ही अंचल था तो सन् 1 9 57 में इस पार्क का नाम ‘जिम कार्बेट नेशनल पार्क’ रखा गया और जिम कार्बेट नेशनल पार्क जाने के लिए भी रास्ता मार्ग हैं। नैनीताल से आनेवाले पर्यटक इस संग्रहहाल को देखकर ही आगे बढ़ते हैं।

जिम कार्बेट का पूरा नाम जेम्स एडवर्ड कार्बेट था। इनका जन्म 25 जुलाई 1875 ई। में हुआ था। जिम कार्बेट बचपन से ही बहुत मेहनती और नीदर व्यक्ति थे।

उन्होंने कई काम किया। इन्ह्सचित्र, स्टेशन मास्टरी और सेना में भी काम किया और अनीत में ट्रान्सपोर्ट अधिकारी तक बना परन्तु उन्हें वन्य पशु का प्रेम अपने तरफ आकर्षित करता है। जब भी उन्हें समय मिलता है, वे कुमाऊ के वनों में घूमने निकल जाने थे। वन्य पशु को बहुत प्यार करते हैं। जो वन्य जन्तु मनुष्य का दुश्मन हो जाता है – उसे वे मारते थे।

जिम कार्बेट के पिता ‘मैथ्यू एंड सन्स’ नामक भवन बनाने वाली कम्पनी में भागडा थे। गर्मियों में जिम कार्बेट का परिवार अयायरपाटा स्थित ‘गुर्नी हाउस’ में रहता था। वे उस मकान में 1 9 45 तक रहे।

ठंडियां में कार्बेट परिवार कालढ़गीगीदार अपने मकान में आते थे। 1 9 47 में जिम कार्बेट अपने बहन के साथ केनिया चले गए थे। वे और बस बस थे। केनिया में ही अस्सी वर्ष की अवस्था में उनके देहनत हो गया।
आज यह पार्क इतना समृद्ध है कि इसके अतिथि-घर में 200 पता एक साथ ठहराने की व्यवस्था है। यहाँ आज सुन्दर अतिथि गृह, केबिन और टेंट उपलब्ध है। खाने का उत्तम प्रबन्ध भी है। ढीकल में हर प्रकार की सुविधा है तो मुख्य गेट के अतिथि-घर में भी पर्याप्त व्यवस्था है।

रामनगर के रेलवे स्टेशन से 12 कि.मी. की दूरी पर ‘कार्बेट नेशनल पार्क’ का गेट है। रामनगर रेलवे स्टेशन से छोटी गाड़ी, टैक्सी और बसों से पार्क तक पहुंचा जा सकता है।

बस सेवाएं भी उपलब्ध हैं। दिल्ली से ढिकाला तक बस आ-जा सकता है। यहां पहुंचने के लिए रामनगर कालागढ़ मार्गों का भी प्रयोग किया जा सकता है। दिल्ली से ढिकाला 2 9 7 कि.मी. है। दिल्ली से गाजियाबाद-हापुड़-मुरदाबाद-काशीपुर-रामनगर में ढाईला तक का मार्ग है। मोटर की सड़क अतिन्त सुन्दर है।

 

 

Jim Corbett National Park

Jim Corbett National Park is India’s oldest national park and was established in 1936 as the Heli National Park to protect the endangered Bengal Tiger. It is located in Nainital district of Uttarakhand and was named after Jim Corbett, who played a key role in its establishment. This was the first park under the tiger project initiative. This is a proud animal pastime. It is situated in 1318.54 sq km of Ramganga in the Patidanga valley, under which 821.99 sq km of Jim Corbett Tiger Reserve is also covered.

There are geographical and ecological features of the sub-himalayan belt in the park. It is also an ecotourism destination and there are 488 species of plants and a variety of organisms. Increasing tourism activities and other problems have presented a serious challenge to the ecological balance of the park.

Corbett has been staying for a long time for tourists and wildlife lovers. Tourism activity is allowed only in the selected areas of Corbett Tiger Reserve so that people get an opportunity to see its magnificent landscape and various wildlife. The number of people coming here has increased dramatically in recent years. At present, more than 70,000 visitors visit the park every season.

520.8 sq. Km (201.1 sq mi) in Corbett National Park includes hillocks, river belts, marshy pits, grasslands and a large lake. Height ranges from 1,300 to 4,000 feet (400 to 1,220 meters). Winter nights are cool here but the days are sunny and warm. It rains from July to September.

Dense moist deciduous forests mainly contain years, haldu, peepal, rhheini and mango trees. Approximately 73% of the forest park covers the area, there are 10% grasslands in this area. Here are 110 tree species, 50 species of mammals, 580 bird species and 25 reptiles.
Moradabad-Kashipur-Ramnagar from Delhi, the distance of the Carbet National Park is 290 km. The tourists visit the Carbet National Park from November to May. In this season, travel agencies arrange to move the tourists to the Carbet National Park. Kumaon Development Corporation also organizes tour operated tours (Kandak Ted Tours) every Friday from Delhi to Carbet National Park. There are experienced guides in Kumaon Development Corporation buses who keep talking about animal information, their habits, and talking.
There are more ‘wild animals’, such as lions, elephants, bears, tigers, pigs, deer, cheetahs, saffron, panda, cucumber, nilgai, sprouts and cheetahs. Similarly in this forest, dragon and many types of snakes reside. While many wild animals are found in this wild animal sanctuary, there are about 600 colors – species of wild birds seen in this park. This country is a sanctuary in which many species of wild animals – birds are also abundant with species. There is no corner of the world today, where tourists are not able to see this park.
The British were also fond of protecting wild animals. In 1935, this region of Ramganga was secured for the protection of wild animals. The name of this park named ‘Heli National Park’ was named after the then Governor Malcolm Haley. After getting independence, the name of this park was named ‘Ramganga National Park’. After independence, Jim Carbet was named as a famous hunter in the world. While Jim Corbett was a perfect shooter, there were also dear friends of wild animals. They killed many man-eating lions in Kumaon and saved hundreds of people. Thousands were freed from fear. In Garhwal, a man-eating lion had taken many people’s lives. That man-eater was also killed by Jim Carbet. That man had killed many people around Rudra Prayag of Garhwal Garhwal. Jim Carbet wrote the books ‘The Man Eater of Rudra Prayag’.

When the Government of India understood the popularity of Jim Corbett and realized that his field B was the same area, then this park was named ‘Jim Corbett National Park’ in 1957 and tourists visiting the Jim Corbett National Park would go by this route. Are there. Tourists coming from Nainital look forward to seeing this museum.
Jim Carbet’s full name was James Edward Corbett. He was born on 25 July 1875 AD. Jim Carbet was a very hard-working and nude person since his childhood. They did many things. He also worked in the driving, station masters and army and in the trance

 

 

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