वाक्य विचार
वाक्य विचार हिंदी व्याकरण का तीसरा खंड है जिसमें वाक्य की परिभाषा, भेद-उपभेद, संरचना आदि से संबंधित नियमों पर विचार किया जाता है।

वाक्य
मुख्य लेख: वाक्य और वाक्य के भेद
शब्दों के समूह को जिसका पूरा पूरा अर्थ निकलता है, वाक्य कहते हैं। वाक्य के दो अनिवार्य तत्त्व होते हैं-

उद्देश्य और विधेय
जिसके बारे में बात की जाय उसे उद्देश्य कहते हैं और जो बात की जाय उसे विधेय कहते हैं। उदाहरण के लिए मोहन प्रयाग में रहता है। इसमें उद्देश्य- मोहन है और विधेय है- प्रयाग में रहता है। वाक्य भेद दो प्रकार से किए जा सकते हँ-

अर्थ के आधार पर वाक्य भेद
रचना के आधार पर वाक्य भेद
अर्थ के आधार पर आठ प्रकार के वाक्य होते हँ-

1-विधान वाचक वाक्य

2- निषेधवाचक वाक्य

3- प्रश्नवाचक वाक्य

4- विस्म्यादिवाचक वाक्य

5- आज्ञावाचक वाक्य

6- इच्छावाचक वाक्य

७- संदेहवाचक वाक्य

काल और काल के भेद
वाक्य तीन काल में से किसी एक में हो सकते हैं:

वर्तमान काल जैसे मैं खेलने जा रहा हूँ।
भूतकाल जैसे ‘जय हिन्द’ का नारा नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने दिया था और
भविष्य काल जैसे अगले मंगलवार को मैं नानी के घर जाउँगा।
वर्तमान काल के तीन भेद होते हैं- सामान्य वर्तमान काल, संदिग्ध वर्तमानकाल तथा अपूर्ण वर्तमान काल।
भूतकाल के भी छे भेद होते हैं समान्य भूत, आसन्न भूत, पूर्ण भूत, अपूर्ण भूत, संदिग्ध भूत और हेतुमद भूत।
भविष्य काल के दो भेद होते हैं- सामान्य भविष्यकाल और संभाव्य भविष्यकाल।

पदबंध
पदबंध दो शब्दो का संयोजन हैं “पद + बंध।

पदबंध जानने से पहले ये जानना ज़रूरी है कि पद या पद परिचय क्या है

(पद: जिस शब्द का पुरा व्याकरण की परिचय देना होता है जैसे शब्द का वचन क्या है , लिंग क्या है , क्रिया है या फिर क्रिया विशेषण , संज्ञा शब्द हैं या फिर सर्वनाम शब्द है आदि की पुरी जानकारी दे उसे पद कहते है।

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