व्याकरण के सन्दर्भ में, किसी वाक्य, मुहावरा या वाक्यांश में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ सम्बन्ध कारक कहलाता है। अर्थात् व्याकरण में संज्ञा या सर्वनाम शब्द की वह अवस्था जिसके द्वारा वाक्य में उसका क्रिया के साथ संबंध प्रकट होता है। कारक यह इंगित करता है कि वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का काम क्या है। कारक कई रूपों में देखने को मिलता है-

शब्दों में विकार – जैसे ‘लड़का’ से ‘लड़के’ ; ‘मैं’ से ‘मुझको’, ‘मेरा’ आदि।
शब्दों के बाद कुछ शब्द आना – ‘गाय को’, ‘वृक्ष से’, ‘राम का’, ‘पानी में’,
अन्य रूप

कुछ भाषाओं में संज्ञा और सर्वनाम के अतिरिक्त विशेषण और क्रियाविशेषण (ऐडवर्ब) में भी विकार आते हैं। जैसे संस्कृत में – ‘शीतलेन जलेन’ में ‘शीतलेन’ विशेषण है।

विभिन्न भाषाओं में कारकों की संख्या तथा कारक के अनुसार शब्द का रूप-परिवर्तन भिन्न-भिन्न होता है। संस्कृत तथा अन्य प्राचीन भरतिय भाषाओं में आठ कारक होते हैं। जर्मन भाषा में चार कारक हैं।

 

उदाहरण (Karak Ke Udaharan)
[ नेता द्वार-द्वार जा रहे हैं ] – अधिकरण कारक
[ वह कुल्हाड़ी से पेड़ कटता है ] – करण कारक
[ माँ ने बच्चों को मिठाई दी ] – सम्प्रदान कारक

कारक के भेद

कारक 8 प्रकार के होते हैं कारक को विभक्ति से भी पहचाना जा सकता है :

क्रम विभक्ति कारक चिन्ह (Karak Chinh)
1 प्रथम कर्ता ने
2 द्वितीय कर्म को
3 तृतीय करण से (के द्वारा)
4 चतुर्थी सम्प्रदान के लिए
5 पंचमी अपादान से (अलग होने के लिए)
6 षष्टी सम्बन्ध का, की, के, रे
7 सप्तमी अधिकरण में, पर
8 अष्टमी संबोधन हे, अरे

विशेष – कर्ता से अधिकरण तक विभक्ति चिह्न (परसर्ग) शब्दों के अंत में लगाए जाते हैं, किन्तु संबोधन कारक के चिह्न-हे, रे, आदि प्रायः शब्द से पूर्व लगाए जाते हैं।

कर्ता कारक

जिस रूप से क्रिया (कार्य) के करने वाले का बोध होता है वह ‘कर्ता’ कारक कहलाता है। इसका विभक्ति-चिह्न ‘ने’ है। इस ‘ने’ चिह्न का वर्तमानकाल और भविष्यकाल में प्रयोग नहीं होता है। इसका सकर्मक धातुओं के साथ भूतकाल में प्रयोग होता है। जैसे- 1.राम ने रावण को मारा। 2.लड़की स्कूल जाती है।

पहले वाक्य में क्रिया का कर्ता राम है। इसमें ‘ने’ कर्ता कारक का विभक्ति-चिह्न है। इस वाक्य में ‘मारा’ भूतकाल की क्रिया है। ‘ने’ का प्रयोग प्रायः भूतकाल में होता है। दूसरे वाक्य में वर्तमानकाल की क्रिया का कर्ता लड़की है। इसमें ‘ने’ विभक्ति का प्रयोग नहीं हुआ है।

विशेष-

(1) भूतकाल में अकर्मक क्रिया के कर्ता के साथ भी ने परसर्ग (विभक्ति चिह्न) नहीं लगता है। जैसे-वह हँसा।

(2) वर्तमानकाल व भविष्यतकाल की सकर्मक क्रिया के कर्ता के साथ ने परसर्ग का प्रयोग नहीं होता है। जैसे-वह फल खाता है। वह फल खाएगा।

(3) कभी-कभी कर्ता के साथ ‘को’ तथा ‘स’ का प्रयोग भी किया जाता है। जैसे-

(अ) बालक को सो जाना चाहिए। (आ) सीता से पुस्तक पढ़ी गई।

(इ) रोगी से चला भी नहीं जाता। (ई) उससे शब्द लिखा नहीं गया।

कर्म कारक

क्रिया के कार्य का फल जिस पर पड़ता है, वह कर्म कारक कहलाता है। इसका विभक्ति-चिह्न ‘को’ है। यह चिह्न भी बहुत-से स्थानों पर नहीं लगता। जैसे- 1. मोहन ने साँप को मारा। 2. लड़की ने पत्र लिखा। पहले वाक्य में ‘मारने’ की क्रिया का फल साँप पर पड़ा है। अतः साँप कर्म कारक है। इसके साथ परसर्ग ‘को’ लगा है। दूसरे वाक्य में ‘लिखने’ की क्रिया का फल पत्र पर पड़ा। अतः पत्र कर्म कारक है। इसमें कर्म कारक का विभक्ति चिह्न ‘को’ नहीं लगा।

करण कारक

संज्ञा आदि शब्दों के जिस रूप से क्रिया के करने के साधन का बोध हो अर्थात् जिसकी सहायता से कार्य संपन्न हो वह करण कारक कहलाता है। इसके विभक्ति-चिह्न ‘से’ के ‘द्वारा’ है। जैसे- 1.अर्जुन ने जयद्रथ को बाण से मारा। 2.बालक गेंद से खेल रहे है।

पहले वाक्य में कर्ता अर्जुन ने मारने का कार्य ‘बाण’ से किया। अतः ‘बाण से’ करण कारक है। दूसरे वाक्य में कर्ता बालक खेलने का कार्य ‘गेंद से’ कर रहे हैं। अतः ‘गेंद से’ करण कारक है।

संप्रदान कारक

संप्रदान का अर्थ है-देना। अर्थात कर्ता जिसके लिए कुछ कार्य करता है, अथवा जिसे कुछ देता है उसे व्यक्त करने वाले रूप को संप्रदान कारक कहते हैं। इसके विभक्ति चिह्न ‘के लिए’ को हैं। 1.स्वास्थ्य के लिए सूर्य को नमस्कार करो। 2.गुरुजी को फल दो। इन दो वाक्यों में ‘स्वास्थ्य के लिए’ और ‘गुरुजी को’ संप्रदान कारक हैं।

अपादान कारक

संज्ञा के जिस रूप से एक वस्तु का दूसरी से अलग होना पाया जाए वह अपादान कारक कहलाता है। इसका विभक्ति-चिह्न ‘से’ है। जैसे- 1.बच्चा छत से गिर पड़ा। 2.संगीता घोड़े से गिर पड़ी। इन दोनों वाक्यों में ‘छत से’ और घोड़े ‘से’ गिरने में अलग होना प्रकट होता है। अतः घोड़े से और छत से अपादान कारक हैं।

संबंध कारक

शब्द के जिस रूप से किसी एक वस्तु का दूसरी वस्तु से संबंध प्रकट हो वह संबंध कारक कहलाता है। इसका विभक्ति चिह्न ‘का’, ‘के’, ‘की’, ‘रा’, ‘रे’, ‘री’ है। जैसे- 1.यह राधेश्याम का बेटा है। 2.यह कमला की गाय है। इन दोनों वाक्यों में ‘राधेश्याम का बेटे’ से और ‘कमला का’ गाय से संबंध प्रकट हो रहा है। अतः यहाँ संबंध कारक है।

जहाँ एक संज्ञा या सर्वनाम का सम्बन्ध दूसरी संज्ञा या सर्वनाम से सूचित होता है, वहाँ सम्बन्ध कारक होता है। इसके विभक्ति चिह्न का, की, के; रा, री, रे; ना, नी, ने हैं। जैसे-

राम का लड़का, श्याम की लड़की, गीता के बच्चे। मेरा लड़का, मेरी लड़की, हमारे बच्चे। अपना लड़का, अपना लड़की, अपने लड़के।

अधिकरण कारक

शब्द के जिस रूप से क्रिया के आधार का बोध होता है उसे अधिकरण कारक कहते हैं। इसके विभक्ति-चिह्न ‘में’, ‘पर’ हैं। जैसे- 1.भँवरा फूलों पर मँडरा रहा है। 2.कमरे में टी.वी. रखा है। इन दोनों वाक्यों में ‘फूलों पर’ और ‘कमरे में’ अधिकरण कारक है।

संबोधन कारक

जिससे किसी को बुलाने अथवा सचेत करने का भाव प्रकट हो उसे संबोधन कारक कहते है और संबोधन चिह्न (!) लगाया जाता है। जैसे- 1.अरे भैया ! क्यों रो रहे हो ? 2.हे गोपाल ! यहाँ आओ। इन वाक्यों में ‘अरे भैया’ और ‘हे गोपाल’ ! संबोधन कारक है।

Examples of Karak

कारक के उदहारण नीचे दिए गए हैं

वाक्य कारक नाम
राम ने खाना खाया कर्ता कारक
राम सीता के लिए लंका गए सम्प्रदान कारक
राम ने रावन को मार दिया कर्म कारक
राम ने धनुष द्वारा रावण को मारा करण कारक
रावण का सर जमीं पर गिर पड़ा अपादान कारक
राम की जय-जयकार होने लगी सम्बन्ध कारक
हे राम! हमें बचाओ संबोधन कारक
बिल्ली छत से कूदी अपादान कारक
लडके दरवाजे-दरवाजे घूम रहे हैं अधिकरण कारक
नेता द्वार-द्वार जा रहे हैं अधिकरण कारक
वह कुल्हाड़ी से पेड़ कटता है करण कारक
माँ ने बच्चों को मिठाई दी सम्प्रदान कारक
वह चाकू से मरता है करण कारक
माता ने बच्चों को सुलाया कर्म कारक
माता ने मुझको पैसे दिए सम्प्रदान कारक
श्याम ने मोहन को साईकिल दी सम्प्रदान कारक
गंगा हिमालय से निकलती है अपादान कारक
वह नदी से पानी ला रहा है अपादान कारक
उसने गीत गाया कर्म कारक
तुम्हारे घर में दस लोग हैं अधिकरण कारक
मेरी बहन सम्बन्ध कारक
प्रेमचंद का उपन्यास सम्बन्ध कारक
मैंने उसे पढ़ाया कर्ता कारक
नदियों का जल स्वच्छ है सम्बन्ध कारक
गाड़ी में ईधन डालो अधिकरण कारक
डाकू दुकान का सारा माल ले गए अपादान कारक

 

1) कर्ता कारक (Karta karak) – Nominative Case:

Vakya me kaam karne waale karta kahte hai.

(वाक्य में काम करने वाले को कर्ता कहते है।)

जैसे (Example):
रोहन ने कहानी लिखा । Rohan ne kahani likha.

वाणी ने खाना पकाई । Vaani ke khana pakai.

तुम कहाँ जा रहे हो ? Tum kahan ja rhe ho.

इन वाक्यों में रोहन, वाणी तथा हम काम करने वाले है। अतः कर्ता कारक है।

2) Karm karak.(कर्म कारक) – Instrument Case:

Noun or pronoun or impact of the action on the object or person is called the karma karak.

Like: Teacher, beats the student. symbol appears. Somewhere karma sign is hide.

Sita eats sweets.

(संज्ञा या सर्वनाम अथवा जिस वस्तु या व्यक्ति पर क्रिया का प्रभाव पड़े उसे कर्म कारक कहते है।)

जैसे (Example) – अध्यापक ,छात्र को पीटता है। इसका चिन्ह को होता है। कहीं – कहीं कर्म का चिन्ह छीपा रहता है।

जैसे (Example) – सीता फल खाती है।

3) Karan karak (करण कारक) – Ablative Case:

The action through the resources is called Karan kaarak.

जिस साधन से क्रिया होता है,उसे करण कारक कहते है।

जैसे (Example): बच्चा बोतल से दूध पीता है। (Baccha botal se dudh pita hai)

बच्चे गेंद से खेल रहे है। (Bacche gend se khel rahe hai)

गेंद ,बोतल की सहायता से काम हो रहा है।( Here ball and bottle is karan karak).

4) Sampradan karak (संप्रदान कारक) – Possessive Case:

This karak indicates that to whom, for whom is called sampradak karak.

(जिसके लिए कर्ता कुछ कार्य करे, उसे सम्प्रदान कारक कहते है। )

जैसे (Example) – गरीबो को खाना दो। (Garibo ko khana do)

मेरे लिए दूध लेकर आओ । (Mere liye dudh lekar aao)

यहाँ पर गरीब ,मेरे ,के लिए काम किया जा रहा है। अतः सम्प्रदान कारक है। (here garib and mere are sampradan karak)

5) Apadan Karak (अपादान कारक) – Objective Case:

(noun or pronoun to be aware of the separation of an object , there is ablative.)

संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से किसी वस्तु के अलग होने का बोध हो,वहां अपादान कारक होता है।

जैसे (Example):
पेड़ से आम गिरा। (Ped se aam gira.)

हाथ से छड़ी गिर गई। (Hath se chadi gir gyi.)

इन वाक्यों में आम ,छड़ी से अलग होने का ज्ञान करा रहे है। (Here aam and stick is seperable word for noun)

6) Sabandh karak (संबंध कारक) – Dative Case:

The Kaarak that signifies any relation or any connection which may exist between two persons or things is called as Sambandh kaarak.

(संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से एक वस्तु का दूसरी वस्तु से सम्बन्ध ज्ञात हो,उसे सम्बन्ध कारक कहते है। )

जैसे (Example) – सीतापुर ,मोहन का गाँव है। (Sitapur, Mohan ka gaon hai)

सेना के जवान आ रहे है। (Sena ,ke jaawan aa rhe hai)

इन वाक्यों में मोहन का गाँव ,सेना के जवान आदि शब्दों का आपस में सम्बन्ध होने का पता चलता है।

7) Adhikaran karak.(अधिकरण कारक) – Locative Case:

It has references to place, time and logical sequences is called adhikaran kaarak.

(संज्ञा के जिस रूप से क्रिया के आधार का बोध हो,उसे अधिकरण कारक कहते है। जैसे (Example) – हरी घर में है। पुस्तक मेज पर है। राम कल आएगा।)

8) Sambodhan karak(संबोधन कारक) – Vocative Case:

The Vocative is the case when a person or persons are directly addressed is called Sambodhan kaarak.

(संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से बुलाने या पुकारने का बोध हो,उसे संबोधन कारक कहते है। )

जैसे (Example) – हे ईश्वर ! रक्षा करो (He ishwar! Raksha kro)

अरे! बच्चों शोर मत करो । (Are! Baccho Shor mat kro)

अरे,हे ईश्वर ,शब्दों से पता चलता है कि उन्हें संबोधन किया जा रहा है

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